विजय के कार्य की वास्तविक कहानी (2)

तुम लोग राजाओं की तरह राज करना चाहा करते थे, और तुम लोगों को आज भी इससे पूर्णतः छुटकारा पाना बाकी है; तुम अभी भी राजाओं की तरह राज करना, स्वर्ग को सँभालना और पृथ्वी को सहारा देना चाहते हो। अब, इस प्रश्न पर विचार करो : क्या तुम ऐसी योग्यताएँ रखते हो? क्या तुममें पूरी तरह से विवेक की कमी नहीं है? क्या तुम लोग जो चाहते हो और जिस पर अपना ध्यान समर्पित करते हो, वह वास्तविक है? तुम लोगों में तो सामान्य मानवता भी नहीं है—क्या यह सर्वथा दयनीय नहीं? इसलिए आज मैं केवल जीत लिए जाने, गवाही देने, अपनी क्षमता बढ़ाने और पूर्ण बनाए जाने के मार्ग में प्रवेश करने की बात करता हूँ, और इसके अलावा कुछ नहीं कहता। कुछ लोग शुद्ध सत्य से विमुख रहते हैं, और वे जब सामान्य मानवता और लोगों की क्षमता बढ़ाने की ये सब बातें होती देखते हैं, तो वे अनिच्छुक हो जाते हैं। जो सत्य से प्रेम नहीं करते, उन्हें पूर्ण बनाना आसान नहीं है। जब तक तुम लोग आज प्रवेश करते हो, और कदम-दर-कदम परमेश्वर के इरादों के अनुसार कार्य करते हो, तब तक क्या लोगों को हटाया जा सकता है? परमेश्वर द्वारा चीन के मुख्य भूभाग में इतना कार्य—इतने बड़े पैमाने का कार्य—कर चुकने और उसके द्वारा इतने वचन कहे जा चुकने के बाद, क्या वह इसे बीच रास्ते में छोड़ सकता है? क्या वह लोगों की अगुआई करके उन्हें अतल कुंड में ले जा सकता है? आज महत्वपूर्ण बात यह है कि तुम सब मनुष्य के सार को जानो, और यह जानो कि तुम लोगों को किसमें प्रवेश करना चाहिए; तुम्हें जीवन प्रवेश, और स्वभाव में परिवर्तनों, वास्तव में कैसे विजित होना है, और परमेश्वर के प्रति कैसे पूरी तरह समर्पण करना है, परमेश्वर के लिए अंतिम गवाही कैसे देनी है और कैसे मृत्युपर्यंत समर्पित कैसे बने रहना है, इन बातों की चर्चा करनी चाहिए। तुम्हें इन बातों पर केंद्रित होना चाहिए, और जो बात वास्तविक या महत्वपूर्ण न हो, पहले उसे किनारे कर नजरंदाज कर देना चाहिए। आज तुम्हें पता होना चाहिए कि विजित कैसे हुआ जाए, और विजित होने के बाद लोगों की अभिव्यक्तियाँ क्या होती हैं। तुम कह सकते हो कि तुम पर विजय पा ली गई है, पर क्या तुम मृत्युपर्यंत समर्पित रह सकते हो? इस बात की परवाह किए बिना कि इसमें कोई संभावना है या नहीं, तुम्हें बिल्कुल अंत तक अनुसरण करने में सक्षम होना चाहिए, और कैसा भी परिवेश हो, तुम्हें परमेश्वर में विश्वास नहीं खोना चाहिए। अतंतः तुम्हें गवाही के दो पहलू प्राप्त करने चाहिए : अय्यूब की गवाही—मृत्युपर्यंत समर्पण; और पतरस की गवाही—परमेश्वर से परम प्रेम। एक मामले में तुम्हें अय्यूब की तरह होना चाहिए : उसने समस्त भौतिक संपत्ति गँवा दी और देह की बीमारी का सामना किया, फिर भी उसने यहोवा का नाम नहीं त्यागा। यह अय्यूब की गवाही थी। पतरस मृत्युपर्यंत परमेश्वर से प्रेम करने में सक्षम रहा—जब उसने अपनी मृत्यु का सामना किया, तब भी उसने परमेश्वर से प्रेम किया, जब उसे क्रूस पर चढ़ाया गया, तब भी उसने परमेश्वर से प्रेम किया। उसने अपने भविष्य का विचार नहीं किया या सुंदर आशाओं अथवा अव्यावहारिक विचारों का अनुसरण नहीं किया, और केवल परमेश्वर से प्रेम करने और परमेश्वर की समस्त व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने का प्रयास किया। इससे पहले कि यह माना जा सके कि तुमने गवाही दी है, इससे पहले कि तुम ऐसा व्यक्ति बन सको जिसे जीते जाने के बाद पूर्ण बना दिया गया है, तुम्हें यह स्तर हासिल करना होगा। आज यदि लोग वास्तव में अपने सार और स्थिति को जानते, तो क्या वे तब भी संभावनाओं और आशाओं का अनुसरण करते हैं? तुम्हें जो जानना चाहिए, वह यह है : परमेश्वर मुझे पूर्ण करे या न करे, मुझे परमेश्वर का अनुसरण करना चाहिए; अब वह जो कुछ भी करता है वह अच्छा है और मेरी खातिर किया जाता है ताकि हमारे स्वभाव बदल सकें और हम शैतान के प्रभाव से मुक्त हो सकें, ताकि गंदगी की भूमि में पैदा हुए हम लोग उस गंदगी से छुटकारा पा सकें और उसे झाड़कर फेंक सकें, शैतान के प्रभाव से मुक्त हो सकें और उससे उबर सकें। निश्चित रूप से तुमसे यही अपेक्षा है, किंतु परमेश्वर के लिए यह विजय मात्र है, जो इसलिए की जाती है कि लोग समर्पण करने का संकल्प लें और सब कुछ परमेश्वर के आयोजनों के हवाले छोड़ सकें। इस तरह से चीजें संपन्न होंगी। आज ज्यादातर लोगों पर विजय पाई जा चुकी है, परंतु उनके अंदर अभी भी बहुत-कुछ विद्रोहमूलकर है और समर्पणकारी नहीं है। लोगों का वास्तविक आध्यात्मिक कद अभी भी बहुत छोटा है। जैसे ही उनके पास आशाएँ और संभावनाएँ होती हैं, वे प्रेरित महसूस करते हैं और यदि उनके पास बिल्कुल भी कोई आशा नहीं होती और कहने लायक कोई संभावना नहीं होती, तो वे नकारात्मक हो जाते हैं और यहाँ तक कि परमेश्वर को छोड़ने के बारे में भी सोचने लगते हैं। इतना ही नहीं, लोगों में सामान्य मानवता को जीने की कोई बड़ी इच्छा नहीं है। यह अस्वीकार्य है। इसलिए मुझे अब भी विजय की बात करनी चाहिए। दरअसल, पूर्णता विजय के वक़्त ही प्रकट होती है : जैसे ही तुम पर विजय पाई जाती है, पूर्ण किए जाने के पहले प्रभाव भी हासिल हो जाते हैं। जहाँ विजय पाने और पूर्ण किए जाने में अंतर होता है, तो वह लोगों में होने वाले परिर्वतन की मात्रा के अनुसार होता है। विजित होना पूर्ण किए जाने का प्रथम चरण है, परंतु यह पूरी तरह से पूर्ण बना दिए जाने का विकल्प नहीं है, न ही यह इस बात का सबूत है कि लोग परमेश्वर द्वारा पूरी तरह से प्राप्त कर लिए गए हैं। लोगों को जीते जाने के बाद उनके स्वभाव में कुछ परिवर्तन आते हैं, किंतु ये परिवर्तन उन लोगों की तुलना में बहुत कम होते हैं, जिन्हें परमेश्वर द्वारा पूरी तरह से प्राप्त कर लिया गया है। आज जो किया जा रहा है, वह लोगों को पूर्ण बनाने का आरंभिक कार्य है—उन पर विजय पाना—और अगर तुम पर विजय नहीं पाई जाती, तो तुम्हारे पास परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाने और उसके द्वारा पूरी तरह से प्राप्त किए जाने का कोई उपाय नहीं होगा। तुम सिर्फ ताड़ना और न्याय के कुछ वचन ही पाओगे, किंतु वे तुम्हारा हृदय पूरी तरह से परिवर्तित करने में असमर्थ होंगे। इस तरह, तुम उनमें से एक होगे, जिन्हें हटा दिया जाता है; यह मेज पर शानदार दावत देखने किंतु उसे खा न पाने से अलग नहीं होगा। क्या यह तुम्हारे लिए बेहद दयनीय परिदृश्य नहीं है? और इसलिए तुम्हें बदलावों का अनुसरण करना चाहिए : जीत लिया जाना हो या पूर्ण बनाया जाना, दोनों का संबंध इस बात से है कि तुम्हारे अंदर बदलाव आए हैं या नहीं और तुम समर्पित हो या नहीं, और यह निश्चित करता है कि तुम परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जा सकते हो या नहीं। जान लो कि “विजित होना” और “पूर्ण किया जाना” केवल तुम्हारे अंदर आए बदलाव और समर्पण की मात्रा पर निर्भर करते हैं, साथ ही इस बात पर कि परमेश्वर के प्रति तुम्हारा प्रेम कितना सच्चा है। आज जरूरत इस बात की है कि तुम्हें पूरी तरह से पूर्ण किया जा सके, परंतु शुरुआत में तुम्हारा विजित होना आवश्यक है—तुम्हें परमेश्वर की ताड़ना और न्याय का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए, अनुसरण करने का विश्वास होना चाहिए, और तुम्हें ऐसा व्यक्ति बनना चाहिए जो बदलावों और परमेश्वर के ज्ञान का अनुसरण करता हो। केवल तभी तुम ऐसे व्यक्ति होगे, जो पूर्ण बनाए जाने की खोज करता है। तुम लोगों को यह समझना चाहिए कि पूर्ण किए जाने के दौरान तुम लोगों को जीता जाएगा, और जीते जाने के दौरान तुम लोगों को पूर्ण बनाया जाएगा। आज तुम पूर्ण बनाए जाने का प्रयास कर सकते हो या अपनी बाहरी मानवता में बदलावों और अपनी काबिलियत में सुधारों काअनुसरण कर सकते हो, परंतु प्रमुख महत्व की बात यह है कि तुम यह समझ सको कि जो कुछ आज परमेश्वर कर रहा है, वह सार्थक और लाभकारी है : यह गंदगी की भूमि में पैदा हुए तुम्हें खुद को गंदगी से छुटकारा पाने और उसे झाड़कर फेंकने में सक्षम बनाता है, यह तुम्हें शैतान के प्रभाव पर विजय पाने और शैतान के अंधकारमय प्रभाव से मुक्त होने में सक्षम बनाता है और तुम्हारा ध्यान इन चीजों पर केंद्रित करवाकर यह तुम्हें इस गंदगी की भूमि में सुरक्षा प्रदान करता है। अंततः तुमसे कौन-सी गवाही देने के लिए कहा जाएगा? यह तुम्हारा, जो कि गंदगी की भूमि में पैदा हुआ है, पवित्रीकृत होने में सक्षम होना है ताकि तुम फिर कभी गंदगी से मैले न हो सको और तुम्हारा, जो कि शैतान की सत्ता के अधीन रहता है, शैतान के प्रभाव से मुक्त होना है ताकि तुम शैतान द्वारा न तो कब्जे में किए जाओ और न ही परेशान किए जाओ और इस प्रकार सर्वशक्तिमान के हाथों में रहो। यही गवाही और शैतान से युद्ध में विजय का साक्ष्य है। तुम शैतान से विद्रोह करने में सक्षम हो, अपने जीवन में अब और शैतानी स्वभाव प्रकट नहीं करते, इसके बजाय उस स्थिति को जीते हो, जिसे परमेश्वर ने मनुष्य के सृजन के समय चाहा था कि मनुष्य प्राप्त करे : सामान्य विवेक, सामान्य विवेक, सामान्य अंतर्दृष्टि, परमेश्वर से प्रेम करने का सामान्य संकल्प और परमेश्वर के प्रति निष्ठा। एक सृजित प्राणी को ऐसी ही गवाही देनी चाहिए। तुम कहते हो, “हम गंदगी की भूमि पर पैदा हुए थे, परंतु परमेश्वर की सुरक्षा के कारण, उसकी अगुआई के कारण, और क्योंकि उसने हम पर विजय प्राप्त की है इसलिए, हम शैतान के प्रभाव से मुक्त हो गए हैं। हम आज समर्पण कर पाते हैं, तो यह भी इस बात का प्रभाव है कि परमेश्वर ने हम पर विजय पाई है, और यह इसलिए नहीं है कि हम अच्छे हैं, या हम स्वभावतः परमेश्वर से प्रेम करते थे। चूँकि परमेश्वर ने हमें चुना और हमें पूर्वनिर्धारित किया, इसीलिए आज हम पर विजय पाई गई है, और इसीलिए हम उसके लिए गवाही देने में समर्थ हुए हैं और उसकी सेवा कर सकते हैं; ठीक वैसे ही, चूँकि उसने हमें चुना और हमारी रक्षा की, इसीलिए हमें उद्धार प्राप्त हुआ है और हमें शैतान की सत्ता से बचाया गया है और हमने गंदगी से छुटकारा प्राप्त कर लिया है और हम बड़े लाल अजगर के देश में शुद्ध किए गए हैं।” इसके अतिरिक्त, जिसे आज तुम बाहरी रूप से जीते हो, वह यह प्रकट करेगा कि क्या तम्हारे अंदर सामान्य मानवता है, तुम जो कहते हो उसमें विवेक है, और क्या तुम एक सामान्य व्यक्ति के सदृश जीते हो। जब दूसरे तुम्हें देखें, तो तुम्हें उन्हें यह कहने का मौका नहीं देना चाहिए, “क्या यह बड़े लाल अजगर का स्वरूप नहीं है?” बहनों का आचरण बहनों के लिए शोभनीय नहीं है, भाइयों का आचरण भाइयों के लिए शोभनीय नहीं है, और तुममें संतों जैसा जरा भी शिष्टाचार नहीं है। फिर लोग कहेंगे, “कोई आश्चर्य नहीं कि परमेश्वर ने कहा कि वे मोआब के वंशज हैं, वह बिल्कुल सही था!” अगर लोग तुम लोगों को देखें और कहें, “हालाँकि परमेश्वर ने कहा था कि तुम मोआब के वंशज हो, परंतु जिस तरह का जीवन तुम जीते हो, उसने यह साबित कर दिया कि तुम लोग शैतान के प्रभाव के मुक्त हो गए हो; हालाँकि ये चीजें अभी भी तुम लोगों के अंदर हैं, लेकिन तुम लोग उनके खिलाफ विद्रोह करने में सक्षम हो—यह दिखाता है कि तुम लोगों पर पूरी तरह से विजय प्राप्त कर ली गई है।” तुम लोग, जो जीत लिए गए और बचा लिए गए हो, कहोगे, “यह सत्य है कि हम मोआब के वंशज हैं, परंतु हमें परमेश्वर द्वारा बचा लिया गया है, और हालाँकि अतीत में मोआब के वंशज नकारे और शापित किए गए थे, और इस्राएल के लोगों द्वारा अन्यजातियों में निर्वासित कर दिए गए थे, किंतु आज परमेश्वर ने हमें बचा लिया है। यह सच है कि हम सभी लोगों में सबसे भ्रष्ट हैं—यह परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत था, यह एक तथ्य है, और सबके द्वारा मान्य है। परंतु आज हम उस प्रभाव से बच निकले हैं। हम अपने पुरखे से घृणा करते हैं, हम अपने पुरखे से विद्रोह करने को तैयार हैं, ऐसा पूरी तरह से करने, परमेश्वर की समस्त व्यवस्थाओं के प्रति समर्पण करने और परमेश्वर के इरादों के अनुसार कार्य करने और इस प्रकार हमसे उसकी अपेक्षाएँ पूरी करने और परमेश्वर के इरादे पूरे करने के लिए तैयार हैं। मोआब ने परमेश्वर को धोखा दिया, उसने परमेश्वर के इरादों के अनुसार कार्य नहीं किया और परमेश्वर ने उससे घृणा की। परंतु हमें परमेश्वर के हृदय के प्रति विचारशील होना चाहिए, और आज चूँकि हम परमेश्वर के इरादे को समझते हैं, इसलिए हम परमेश्वर को धोखा नहीं दे सकते, और हमें अपने पुराने पुरखे के खिलाफ विद्रोह कर देना चाहिए!” पहले मैंने बड़े लाल अजगर के खिलाफ विद्रोह करने की बात की, और आज की बात मुख्य रूप से लोगों के पुराने पुरखे के खिलाफ विद्रोह करने के बारे में है। यह मनुष्य पर विजय पाने की गवाही का एक पहलू है, और बिना इस पर ध्यान दिए कि आज तुम कैसे प्रवेश करते हो, इस क्षेत्र में तुम्हारी गवाही में कमी नहीं होनी चाहिए।

लोगों की काबिलियत बहुत कम है, उनमें सामान्य मानवता की बेहद कमी है, उनकी प्रतिक्रिया बहुत धीमी और बहुत सुस्त है, शैतान की भ्रष्टता ने उन्हें सुन्न और मंदबुद्धि बनाकर रख छोड़ा है, और वे एक-दो वर्षों में पूरी तरह से परिवर्तित नहीं हो सकते, फिर भी उनमें सहयोग करने का संकल्प होना चाहिए। कहा जा सकता है कि यह भी शैतान के समक्ष गवाही है। आज की गवाही विजय के वर्तमान कार्य से प्राप्त परिणाम है, साथ ही वह भावी अनुयायियों के लिए एक नमूना और आदर्श भी है। भविष्य में यह असंख्य राष्ट्रों में परिचालित हो जाएगा; चीन में जो कार्य किया जा रहा है वह असंख्य राष्ट्रों में परिचालित हो जाएगा। मोआब के वंशज विश्व में सब लोगों से निम्न हैं। कुछ लोग पूछते हैं, “क्या हाम के वंशज सबसे निम्न नहीं हैं?” बड़े लाल अजगर की संतानें और हाम के वंशज भिन्न-भिन्न प्रातिनिधिक महत्व के हैं, और हाम के वंशज एक अलग मामला हैं : भले ही उन्हें किसी भी प्रकार शापित किया जाता हो, वे फिर भी नूह के वंशज हैं; इस बीच, मोआब की उत्पत्ति शुद्ध नहीं थी : मोआब व्याभिचार से आया था, और इसी में अंतर निहित है। हालाँकि दोनों को शाप दिया गया था, पर उनकी हैसियत समान नहीं थी, और इसलिए मोआब के वंशज सब लोगों से निम्न हैं—और सबसे निम्न लोगों पर विजय से अधिक ठोस तथ्य कुछ नहीं हो सकता। अंत के दिनों का कार्य सारे विनियमों से अलग है, और चाहे तुम शापित हो या दंडित, अगर तुम मेरे कार्य के लिए फायदेमंद हो और आज के विजय के कार्य में लाभप्रद हो, और चाहे तुम मोआब के वंशज हो या बड़े लाल अजगर की संतान, अगर तुम कार्य के इस चरण में एक सृजित प्राणी का कर्तव्य निभा सकते हो और अपना कार्य पूरी तरह से करते हो, तो उचित परिणाम प्राप्त होगा। तुम बड़े लाल अजगर की संतान हो, और तुम मोआब के वंशज हो; कुल मिलाकर, जो भी रक्त-मांस से बने हैं, वे सभी सृजित प्राणी हैं, और वे सृष्टिकर्ता द्वारा बनाए गए थे। तुम सृजित प्राणी हो, तुम्हारी अपनी कोई पसंद नहीं होनी चाहिए, और यही तुम्हारा कर्तव्य है। निस्संदेह, आज सृष्टिकर्ता का कार्य समस्त ब्रह्मांड पर निर्देशित है। तुम किसी भी वंश के क्यों न हो, अंततः तुम सृजित प्राणियों में से एक हो, तुम लोग—मोआब के वंशज—सृजित प्राणियों का अंग हो, अंतर सिर्फ़ यह है कि तुम्हारा मूल्य कम है। चूँकि आज परमेश्वर का कार्य समस्त सृजित प्राणियों में किया जा रहा है और समस्त ब्रह्मांड उसका लक्ष्य है, इसलिए सृष्टिकर्ता अपना कार्य करने के लिए किसी भी व्यक्ति, घटना या वस्तु का चयन करने को स्वतंत्र है। वह इस बात की चिंता नहीं करता कि तुम किसके वंशज हो, जब तक तुम एक सृजित प्राणी हो, और जब तक तुम उसके कार्य—विजय के कार्य—और उसकी गवाही—के लिए लाभदायक हो, तब तक वह बिना किसी आशंका के तुम पर अपना कार्य करेगा। यह लोगों की परंपरागत धारणाओं को खंड-खंड कर देता है, जैसे यह है कि परमेश्वर कभी अन्यजातियों के मध्य कार्य नहीं करेगा, विशेषकर उनमें, जो शापित और निम्न हैं, क्योंकि जो शापित हैं, उनकी आगामी समस्त पीढ़ियाँ भी सदा के लिए शापित रहेंगी, उन्हें कभी उद्धार का कोई अवसर प्राप्त नहीं होगा; परमेश्वर कभी अन्यजाति राष्ट्र की भूमि पर उतरकर कार्य नहीं करेगा, और कभी मलिनता की भूमि पर अपने कदम नहीं रखेगा, क्योंकि वह पवित्र है। ये सभी धारणाएँ परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य द्वारा चकनाचूर कर दी गई हैं। जान लो कि परमेश्वर समस्त सृजित प्राणियों का परमेश्वर है, वह स्वर्ग, पृथ्वी और सभी चीजों पर संप्रभुता रखता है, और केवल इस्राएल के लोगों का परमेश्वर नहीं है। इसलिए चीन में यह कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है, और क्या यह असंख्य राष्ट्रों परिचालित नहीं किया जाएगा? भविष्य की महान गवाही चीन तक सीमित नहीं रहेगी; यदि परमेश्वर केवल तुम लोगों को जीतता है, तो क्या दानवों को कायल किया जा सकता है? वे जीते जाने या परमेश्वर के सामर्थ्य को नहीं समझते, और केवल जब समस्त ब्रह्मांड में परमेश्वर के चुने हुए लोग इस कार्य के चरम परिणामों का अवलोकन करेंगे, तभी सब सृजित प्राणी जीते जाएँगे। कोई भी मोआब के वंशजों से अधिक पिछड़ा और भ्रष्ट नहीं है। यहाँ तक कि ऐसे लोगों पर भी विजय पा ली गई है—यानी वे जो कि सबसे अधिक भ्रष्ट थे, जिन्होंने परमेश्वर को स्वीकार नहीं किया, या इस बात पर विश्वास नहीं किया कि परमेश्वर है, जब जीत लिए जाएँगे और वे अपने मुख से परमेश्वर को स्वीकार करेंगे, उसकी स्तुति करेंगे और उससे प्रेम करने में समर्थ हैं—यह और सिर्फ यही विजय की गवाही है। हालाँकि तुम लोग पतरस नहीं हो, पर तुम पतरस की छवि को जीते हो, तुम पतरस की गवाही धारण करने योग्य हो, और अय्यूब की भी, और यह सबसे महान गवाही है। अंततः तुम कहोगे, “हम इस्राएली नहीं हैं बल्कि मोआब के नकारे गए वंशज हैं, हम पतरस नहीं, उसकी जैसी काबिलियत पाने में हम सक्षम नहीं, न ही हम अय्यूब हैं, और हम पौलुस के परमेश्वर के लिए कष्ट सहने और खुद को परमेश्वर के लिए खपाने के संकल्प से तो तुलना भी नहीं कर सकते, और हम इतने पिछड़े हुए हैं, और इसलिए हम परमेश्वर के आशीषों का आनंद लेने के अयोग्य हैं। परमेश्वर ने फिर भी आज हमें उन्नत किया है; इसलिए हमें परमेश्वर को संतुष्ट करना चाहिए, और हालाँकि हमारी क्षमता और योग्यताएँ अपर्याप्त हैं, लेकिन हम परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए तैयार हैं—यह हमारा संकल्प है। हम मोआब के वंशज हैं, और हम शापित हैं। यह परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत था, और हम इसे बदलने में असमर्थ हैं, परंतु हमारा जीवन और हमारा ज्ञान बदल सकता है, और हमारे पास परमेश्वर को संतुष्ट करने का संकल्प है।” जब तुम्हारे पास यह संकल्प होगा, तब यह साबित करेगा कि तुम्हारे पास पहले ही जीते जाने की गवाही है।

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परमेश्वर का प्रकटन और कार्य परमेश्वर को जानने के बारे में अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन मसीह-विरोधियों को उजागर करना अगुआओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ सत्य के अनुसरण के बारे में सत्य के अनुसरण के बारे में न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सत्य वास्तविकताएं जिनमें परमेश्वर के विश्वासियों को जरूर प्रवेश करना चाहिए मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 1) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 2) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 3) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 4) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 5) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 6) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 7) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 8) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवात्मक गवाहियाँ (खंड 9) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

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