141  मैं अनंत काल तक परमेश्वर से प्रेम करूँगा

1 हे परमेश्वर! तुम्हारे वचन मुझे वापस तुम्हारे सामने बुलाते हैं। राज्य में दिन और रात अपना प्रशिक्षण करता हूँ मैं स्वीकार। कितनी ही बार मैं कमजोर और नकारात्मक हुआ, और तुम्हारे वचनों ने मुझे शांत किया, समर्थन दिया। कितनी ही बार मैं प्रलोभन में पड़ा, और तुमने मुझे बचाया और मुझे अद्भुत ढंग से राह दिखाई। और कितनी ही बार सीसीपी द्वारा मेरा पीछा किया गया और मुझे सताया गया। यह तुम ही थे, जिसने हमेशा गुप्त रूप से मेरी रक्षा की, मुझे राह दिखाई। तुमने कई कठिनाइयों और खतरों में मेरी अगुआई की है। तुमने पीड़ा और क्लेशों के दौरान मेरा साथ दिया है। केवल अब मैं देखता हूँ कि तुम्हारा प्यार कितना वास्तविक है।

2 हे परमेश्वर! न्याय के जरिये मैंने तुम्हारा सच्चा प्यार देखा है। मैंने देखा है कि तुम्हारा धार्मिक स्वभाव वास्तव में कितना सुंदर है। कितनी ही बार मैंने अपनी हैसियत के लिए काम किया—तुमने मेरी काट-छाँट की और मुझसे निपटे। कितनी ही बार मैं घमंडी और दंभी हुआ—तुमने मुझे अनुशासित किया और मुझ पर प्रहार किया। परीक्षणों और शुद्धिकरण के माध्यम से मैंने तुम्हारा आज्ञापालन करना सीखा है। तुम्हारे वचन में बढ़ते हुए मैं मानवीय समानता को जीता हूँ। हे परमेश्वर! सदा-सर्वदा प्रेम करूँगा तुझको मैं। धन्य होऊँ या शापित होऊँ, तुम्हारी संप्रभुता और व्यवस्थाओं का पालन करूँगा मैं। इंतजार नहीं करवाऊँगा, तुझे सच्चा प्रेम दूँगा मैं। तुम्हें अपना पावन प्रेम दूँगा मैं, और अपने प्रेम का आनंद लेने दूँगा। तुम्हें अपना सारा प्रेम दूँगा मैं, और तुम्हें अपना प्रेम लेने दूँगा। तुम्हें अनंत काल तक प्रेम करूँगा मैं। तुम्हें संतुष्ट करना मेरी ख्वाहिश है।

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