321  कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं

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कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं; वे पवित्र आत्मा के कार्य और मार्गदर्शन का आनंद लेते हैं।

परमेश्वर के वचनों को पढ़कर वे प्रबुद्ध और रोशन हो जाते हैं; उनके दिलों में रोशनी होती है, और उनके पास अनुसरण के लिए एक मार्ग होता है।

देह से मुँह मोड़ना, धर्मनिरपेक्ष दुनिया को पीछे छोड़ देना, और परमेश्वर के सामने जीना कितना आनंदमय है।

परमेश्वर की इच्छा के प्रति सचेत रहकर अपना कर्तव्य अच्छी तरह निभाते हुए उनकी आत्माएँ संतुष्ट और शांत रहती हैं।

कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं; वे अकसर न्याय और ताड़ना के भागी होते हैं।

न्याय को स्वीकार कर वे शुद्ध हो जाते हैं, और उनके स्वभाव में होने वाले बदलाव परमेश्वर के लिए महिमा लाते हैं।

कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं; वे उसकी इच्छा को अपना स्वर्गिक उद्यम मानते हैं।

सत्य का अभ्यास और परमेश्वर का आज्ञापालन करते हुए वे परमेश्वर का भय मानते हैं और प्रकाश में जीते हैं।

कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं।


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कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं; वे उसके परीक्षण और उसकी पूर्णता हासिल करते हैं।

पीड़ा और विपत्ति में परमेश्वर को साथ पाकर वे उसके प्रेम की वास्तविकता चखते हैं।

शैतान के प्रभाव से बचकर वे परमेश्वर के साथ दिलोदिमाग से एक होते हैं।

शोधन के माध्यम से उनका प्रेम और अधिक शुद्ध हो जाता है, और वे सदा परमेश्वर की बड़ाई करते और उसकी गवाही देते हैं।

कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं; वे अच्छे और बुरे समय में उसके आयोजनों के प्रति समर्पित होते हैं।

वे मृत्युपर्यंत वफादारी के साथ परमेश्वर का अनुसरण करते हैं और उसके लिए अपना पूरा जीवन खपा देते हैं।

कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं; वे अपनी आत्मा और सत्य में उसकी उपासना करते हैं।

वे उसके अंतरंग हो जाते हैं, और उसके वादे और आशीष प्राप्त करते हैं।

कितने धन्य हैं वे, जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं।

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