641  केवल सृष्टिकर्ता मानवता पर दया करता है

1

मानवता के साथ केवल सृष्टिकर्ता का है दया और प्रेम का अटूट बंधन।

बस वो ही संजोता अपनी सारी सृष्टि।

उसका हर विचार, होता हमेशा मानवता की भलाई के लिए,

मानवता की भलाई के लिए।

उनके अस्तित्व से बंधे हैं परमेश्वर के हर जज़्बात।

परमेश्वर के स्वभाव की अभिव्यक्ति, सब कुछ है मानवता के लिए।

सब कुछ है मानवता के लिए। सब कुछ है मानवता के लिए।


2

इंसान के सभी कामों को वो अपने दिल के भीतर महसूस करता है।

इंसान की भ्रष्टता उसके गम और क्रोध को जगाती है।

इंसानों का पछतावा देख उन्हें वो माफ करता है,

उनके पछतावे से वो खुश हो जाता है।

इंसान के लिए हमेशा कामों में लगा रहता है।

अपने जीवन का हर पल, वो अर्पित करता है,

और बिन कुछ भी कहे वो अपने जीवन के हर एक अंश को अर्पित करता है।

ये सब कुछ है मानवता के लिए। ये सब कुछ है मानवता के लिए।

ये सब कुछ है मानवता के लिए।


3

अपने जीवन पर दया करना वो जानता नहीं, मगर मानवता को वो संजोता है।

अपने हाथों से सजाई है ये चमत्कारी मानवता उसने।

दया और उदारता का वो देता है दान,

बिना किसी शर्त या फल की इच्छा करते हुए,

ताकि इंसान जिए हमेशा उसकी निगाहों तले,

कि एक दिन इंसान कहना माने और माने कि वही है उनका पोषण करने वाला,

और माने कि वही है,

सृष्टि को देता है जीवन का दान, सारी सृष्टि को जीवनदान,

सारी सृष्टि को जीवनदान।

उसका हर विचार, होता हमेशा मानवता की भलाई के लिए।

उनके अस्तित्व से बंधे हैं परमेश्वर के हर जज़्बात।

परमेश्वर के स्वभाव की अभिव्यक्ति, सब कुछ है मानवता के लिए।

सब कुछ है मानवता के लिए। सब कुछ है मानवता के लिए।

सब कुछ है मानवता के लिए।


—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II से रूपांतरित

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