668  सब ओर है परमेश्वर का अधिकार

1

हर हाल में अस्तिव में रहता है अधिकार परमेश्वर का।

अपने विचारों और इच्छा से, परमेश्वर करता है नियन्त्रण, प्रबन्धन

इन्सान की नियति और हर चीज़ का,

इन्सान के बदलने से यह नहीं बदलेगा।

आज़ाद है ये इन्सान की इच्छा से।

समय, आकाश या भूगोल में बदलाव से नहीं बदला जा सकता इसे।

क्योंकि परमेश्वर का अधिकार ही उसका सार है।

परमेश्वर का अधिकार अद्वितीय है, और यह किसी इन्सान या जगह से

किसी चीज़ या आकाश से, सीमित या संकुचित नहीं।

सब जगह है परमेश्वर का अधिकार, हर घंटे, हर पल।

स्वर्ग और जमीं टल ज़मीं मगर, परमेश्वर का अधिकार टलेगा नहीं।


2

इन्सान परमेश्वर का नियम माने, न माने

उसकी नियति पर परमेश्वर की प्रभुता बदलेगी नहीं।

तुम उसका नियम जानो, न जानो, परमेश्वर का सामर्थ अस्तित्व में है अभी भी।

तुम अगर न करो आज्ञापालन तो भी, उसके आदेश तले है तुम्हारी नियति।

इन्सान की इच्छा से परे है

परमेश्वर का अधिकार और इन्सान की नियति पर उसका राज।

इन्सान की इच्छा या चुनाव के अनुसार, वे कभी बदलते नहीं।

परमेश्वर का अधिकार अद्वितीय है, और यह किसी इन्सान या जगह से

किसी चीज़ या आकाश से, सीमित या संकुचित नहीं।

सब जगह है परमेश्वर का अधिकार, हर घंटे, हर पल।

स्वर्ग और जमीं टल जायें मगर, परमेश्वर का अधिकार टलेगा नहीं।


3

हर समय परमेश्वर अपना अधिकार काम में लाता है,

अपना सामर्थ दिखाता, अपना काम करता रहता है,

सब पर शासन करता और आपूर्ति करता है,

हमेशा के जैसे सबका आयोजन करता है।

ये है एक सच्चाई जिसे कोई नहीं बदल सकता;

आदिकाल से ये रहा है ऐसा ही।

परमेश्वर का अधिकार अद्वितीय है, और यह किसी इन्सान या जगह से

किसी चीज़ या आकाश से, सीमित या संकुचित नहीं।

सब जगह है परमेश्वर का अधिकार, हर घंटे, हर पल।

स्वर्ग और जमीं टल जायें मगर, परमेश्वर का अधिकार टलेगा नहीं।


—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III से रूपांतरित

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